संपादकीय
कर्मयोगी के विचार:
सत्य को किसी निश्चित सूची की आवश्यकता नहीं होती; वह मानवीय खोज के विभिन्न कालों में, पूछताछ की परतों के माध्यम से स्वयं को प्रकट करता है।
वेदों, उपनिषदों, ब्राह्मणों और पुराणों में सप्तऋषियों के उल्लेखों की एक गहन दस्तावेज़ी जाँच — यह दर्शाती है कि कैसे यह अवधारणा प्रेरित कवियों से ब्रह्मांडीय प्रतीकों तक विकसित हुई।

संपादकीय
कर्मयोगी के विचार:
सत्य को किसी निश्चित सूची की आवश्यकता नहीं होती; वह मानवीय खोज के विभिन्न कालों में, पूछताछ की परतों के माध्यम से स्वयं को प्रकट करता है।
श्लोक
Vishnu Purana — Traditional Puranic Enumeration of the Saptarishis
मरीचिरत्रिरङ्गिराश्च पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः। वसिष्ठश्च महातेजाः सप्तर्षयः प्रकीर्तिताः॥
मरीचिरत्रिरङ्गिराश्च पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः। वसिष्ठश्च महातेजाः सप्तर्षयः प्रकीर्तिताः॥
हिंदी अर्थ
मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और तेजस्वी वशिष्ठ — ये सात ऋषि कहे जाते हैं।
विष्णु पुराण का यह श्लोक वर्तमान वैवस्वत मन्वन्तर के सात ऋषियों की सर्वाधिक प्रसिद्ध पारंपरिक सूची प्रस्तुत करता है।
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संपादकीय दिशा के लिए प्रयुक्त संदर्भ